Saturday, July 23, 2011

सीमा की चुदाई


आज आपको एक ऐसी कहानी सुनाना चाहता हूँ जो सारी कहानियों से अलग हो। उम्मीद है आप सब को पसन्द आएगी।

कहानी है एक खुशहाल परिवार की जिसमें एक भाई रोहित २१ साल का, बहन सीमा १८ साल की, डैडी श्री सूर्यकान्त और उनकी पत्नी साक्षी हैं।

सूर्यकान्त: मेरी टाई नहीं मिल रही साक्षी, कहाँ है?

साक्षी : यहीं होगी…………….ओह ! ये रही, आप भी ना !………..

रोहित : मम्मी मेरे जूते नहीं दिख रहे !

साक्षी : तुम आकर जाने कहाँ रख देते हो? तुम्हारा रोज़ का यही काम होता है, ये लो ! और आज सम्भाल कर रखना !

हर रोज़ इसी तरह रोहित कॉलेज़, सीमा स्कूल और मिस्टर सूर्यकान्त अपने ऑफ़िस जाते हैं।





यही है रोज़ का इस घर का किस्सा !

समय बीत रहा है।

एक दिन अचानक किसी का फ़ोन आया कि सीमा को कोई अगवा करके ले गया है और वो दो लाख रूपए मांग रहा है। पैसे ना देने पर सीमा का क्या हाल हो सकता है आप सभी जानते हैं।

घर पर सभी परेशान थे कि क्या होगा !

पुलिस में खबर नहीं कर सकते क्योंकि अपहरणकर्ता ने मना किया है और लड़की का मामला है।
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शानू मेरा पहला सेक्स अनुभव


हमारे किरायेदार की बीबी बहुत ही सुन्दर थी, वो पंजाब की रहने वाली थी और जब पंजाब की है तो सुन्दर तो होगी ही। उसका नाम शानू था। उमर होगी करीब २६-२७ साल, रंग एकदम दूध की तरह सफ़ेद। एकदम गोल-२ स्तन थे उसके। उन दिनो मैं बहुत सी व्यस्क पुस्तकें पढ़ता था। इसी वजह से मुझे छोटी सी उमर में की सेक्स का काफ़ी ज्ञान हो गया था।
बस हर समय चूत मारने का दिल करता रहता था। और जब शानू आंटी को देख लेता था तो मेरा लंड पैंट फाड़कर बाहर आने को हो जाता था। शानू को कहने में भी डर लगता था क्योंकि वो तो मुझे कम उम्र समझती थी। इसलिये मुट्ठी मार कर ही काम चलाना पढ़ता था।

मैं तो शानू के स्तन देखने के लिये बेचैन रहता था। जब वो अपने कमरे में झुककर झाड़ू लगाती थी तो मुझे उसके सेक्सी स्तनों के दर्शन हो जाते थे। दोस्तो अभी तक तो मैं उसके चूचे ही देखता था लेकिन एक दिन मेरी किस्मत खुली और मैंने शानू को बिल्कुल नंगा देखा।

हुआ क्या कि मैं अक्सर उसके कमरे में जाता था ताकि मैं उसको देख सकूँ।





एक दिन मम्मी ने मुझे शानू को कुछ देने के लिये भेजा, मैं दरवाजे को बिना खटखटाये ही शानू के कमरे में घुस गया, उस समय शानू अपने कपड़े बदल रही थी और वो बिल्कुल नंगी थी। मैंने जैसे ही उसको देखा तो मेरे सारे शरीर में एक करेंट सा दौड़ गया, वो घबराकर किचन में चली गई और मैं भी कमरे से बाहर आ गया। मेरा दिल जोर-२ से धड़क रहा था
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Sunday, July 17, 2011

मेरी सुहागरात


बचपन में जब मैं पांच साल का था तब मेरी ताईजी का देहांत होने के कारण उनकी लड़की जो मुझसे सात साल बड़ी हैं हमारे साथ रहती थी. उनका नाम मंजू है. मेरे पिताजी सरकारी ऑफिस में अच्छी पोस्ट पर काम करते थे. हमें सरकारी मकान मिला हुआ था. मकान बहुत बड़ा था और उसके कमरे भी बहुत बड़े थे.
चार बैडरूम, रसोई और बैठक थे उस मकान में. जबकि उस समय मैं नीरज, मेरा छोटा भाई छोटा और छोटी बहिन मुन्नी, मां, बाबूजी और मंजू जीजी कुल छः लोग ही उस मकान में रहते थे.

जैसे जैसे बड़ा हुआ एक्सरसाइज़ ठीक होने से लंड का साइज़ भी सात इंच का हो गया. पिताजी का तबादला राजस्थान के अलग अलग शहरों में होता हुआ जयपुर में कुछ समय रुका तो पिताजी ने यहाँ घर बनवा लिया. अब स्कूल में उसके बाद लड़को के कोलेज में पढ़ा लेकिन लड़कियों से बात करने में गांड फटती थी इसलिए हमारी गली में आठ लड़कियां होते हुए भी खूब इच्छा होने पर भी मैं उनमे से एक को भी पटा नही पाया. इच्छा बहुत होती थी चोदने कि लेकिन मुट्ठ मारकर ही काम चलाना पड़ता था. साइंस का छात्र था इसलिए पढ़ा सबकुछ लेकिन प्रैक्टिकल हो नही पाया. बाईस साल का होने पर मेरा कद छः फुट आ गया रंग साफ़ और चेहरा आकर्षक.

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काम वाली की चूत


मेरा नाम संदीप है और मैं दिल्ली में रहता हूँ. मेरा लण्ड ६.५ इन्च का है और मेरी हाईट ६.२ फ़ीट शरीर सामान्य.

तो फिर बात ऐसी है कि मेरी कोई गर्ल-फ़्रेन्ड नहीं है और मैं अक्सर अपने फ्रेंड्स की गर्ल-फ़्रेन्ड को देख कर परेशान सा होया करता था कि भगवान् मेरी कब सुनेगा. लेकिन उसक घर देर है पर अंधेर नहीं है.

अचानक मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी जोकि हाईट में मुझ से बहुत छोटी थी मैंने मन ही मन कहा कि क्या माल है लेकिन फिर कहा कि यार ये तो अभी छोटी है लेकिन मैं ग़लत था उसकी हाईट ही बस छोटी थी बाकि और सब बड़े बड़े कसे हुए थे. मैंने कहा यह लड़की अगर मेरी फ्रेंड बन जाए तो क्या बात है और इतिफाक से वोह मेरे घर की तरफ़ ही आ रही थी।

मैंने देखा उसकी क्या गांड थी मानो दो ढोल. बाद में पता चला कि वोह मेरे आंटी के यहाँ काम करने आती है फिर क्या था सरदार बहुत ही खुश हुआ. और चोदने के प्लान बनाने लगा।

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नैना की चुदाई


मैं हमेशा जब भी फ्री रहता हूँ देसी कहानियाँ जरूर पढता हूँ। और स्टोरीज पढने के बाद मुझे लगता है कि मुझसे कोई लड़की कयू नहीं सेक्स कराती है मुझे में कोई कमी भी नही मैं ५' १०" समार्ट लड़का हूँ और किसी भी लड़की को सेक्स में सैटिस्फ़ाई करने में एकदम सक्षम हूँ।
लेकिन मुझे लगा कि मेरे पास लड़कियो को पटाने की हिम्मत नही एक डर रहता था मुझे कि कही कोई लड़की मुझे मना ना कर दे वरना मेरा दिल टूट जाएगा। मेरी उमर २७ साल है एकदम हट्टा कट्टा जवान लड़का हूँ जब मैं १० साल का था तब से किसी लड़की के साथ सेक्स करने का सपने देखा करता था। मैने बहुत सारी सेक्स बुक्स पढी और सेक्स मूवी देख कर एक ही सपने देखा करता था कि काश उस लड़की के साथ मैं सेक्स कर रहा हूँ। लेकिन सपनो को सच होने में पूरे १४ साल लगे। यह मेरी पहली कहानी है और अब आप के सामने है जल्दी और भी कहानी आप के सामने आने वा्ली है तो एनजोय करो दोस्तो।



मेरी यह कहानी एकदम सच्ची है जो आप लोगो को एकदम अपने करीब लगेगी। मैं पिछले ६ सालो से चैटिंग कर रहा हूं लेकिन कोई लड़की मुझसे पटती ही नहीं थी। सब लड़कियों को सेक्स चैट पसंद था जो मुझे एकदम पसंद नहीं था। तब एकदम चमत्कार हुआ एक बहुत अच्छी लड़की मेरी दोस्त बनी, वो अमेरीका रहती थी और एक भारतीय थी जिस का नाम नैना था जो दिल्ली की रहने वाली थी। वो बहुत सुन्दर और स्मार्ट लड़की थी। वो इतनी सु्न्दर थी कि जब मैंने कैम में उस को पहली बार देखा तो देखता रह गया और कब मुझे वो पसंद आने लगी मुझे पता तक नहीं .
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रेशमा की मस्त चुदाई

मैं वाराणसी, यू पी का रहने वाला हूं एवं मेरा नाम राज, उम्र बाईस साल है।

आज से चार साल पहले मैं अपने पड़ोस में एक परिवार के घर में आता जाता था। उस परिवार में पति, पत्नी और उनके चार बच्चे थे। पति मज़दूरी करता था। उसकी पत्नी का नाम रेशमा था,
वो तीस साल की थी। धीरे धीरे मैं उनके घर ज्यादा आने जाने लगा। नैं उनकी छोटी बच्ची को खिलाता रहता था। रेशमा मुझे पसन्द करने लगी थी। मुझे भी वो अच्छी लगती थी। मैं रेशमा से बातें करते करते काफ़ी खुल चुका था और ओससे सेक्स के बारे में भी बातें करने लगा था।





एक दिन ऐसा हुआ कि रेशमा ने बाज़ार से कुछ सामान मंगवाने के लिए मुझे बुलाया, वह सन्दूक से पैसे निकालने लगी और मैं पलंग पर बैठ गया। अचानक रेशमा ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। मैं हक्का बक्का रह गया। उसने कहा कि मैं तुमसे प्यार करती हूं। उस समय मैं कुछ नहीं बोला पर जब मैं सामान ले कर वापिस आया तो उसने मुझे फ़िर गले लगा लिया। इस बार मैंने उसकी चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया, पर कोई देख ना ले। इस डर से मैं उस समय वहां से चला गया।





हम सदा सेक्स करने के लिए मौका ढूंढते रहते थे। एक दिन हमें मौका मिल ही गया। हमारे घर मेरे दोस्त आए हुए थे इसलिए हम छत पर सोने के लिए गए। रेशमा भी छत पर सोने के लिए आ गई। उस समय उसका पति शहर से बाहर गया हुआ था। मैंने उसे इशारे से कह दिया- आज मैं आऊंगा। वह समझ गई। जब मेरे दोस्त सो गए तो मैं दीवार पार करके उसके पास गया। वो मेरा इन्तज़ार कर रही थी।

मैं धीरे से उसकी चारपाई पर लेट गया।
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